एक हलकी सी मुस्कान लबों पे खिल उठी
तेरे आने की आहट जब दरवाज़े पे आ रुकी
दरवाज़े के इस तरफ थी बेचैन सी सांसें
और उस तरफ keyhole से दिखती तेरी गहरी दो आँखें
मेरी धड़कन doorbell से तेज़ थी
तबियत बिगड़ रही थी बेचारे दिल की
कुछ देर और रोक लेती खुद को, तो तुम्हे लगता मैं घर पे नहीं हूँ
सोचा तीन साल बाद तुमसे रूबरू होने का मौका ऐसे ही जाने दूँ
पर रोक सकती बीमार दिल को तो क्या बात थी
दिल भी उतना मजबूर था जितनी मैं मगरूर थी
दिल जीता मैं हारी और खुल गया दरवाज़ा
दो feet की दूरी पे थे तुम, मेरी आँख में चुभा कुछ धुआं सा
आंसू मैंने बहने नहीं दिए, रोक के रक्खा उन्हें अपनी जगह
छलक के पूछना चाहती थी तुमसे सालों तक ना आने की वजह
तुम्हारे माथे की शिकंज तुम्हारा हाल बयान कर गयी
दिल से हारने के बाद आज मैं फिर खुद से हार गयी
जा रहे थे तुम मेरे हाथ में कागज़ का टुकड़ा थमाए
कुछ सीढ़ियों की दूरी को हम तैय नहीं कर पाए
दस मिनट में मैं शादीशुदा से तलाक़शुदा हो गई
एक दरवाज़ा खोलने का फैसला मेरी बाकी की ज़िन्दगी बन गई
तेरे आने की आहट जब दरवाज़े पे आ रुकी
दरवाज़े के इस तरफ थी बेचैन सी सांसें
और उस तरफ keyhole से दिखती तेरी गहरी दो आँखें
मेरी धड़कन doorbell से तेज़ थी
तबियत बिगड़ रही थी बेचारे दिल की
कुछ देर और रोक लेती खुद को, तो तुम्हे लगता मैं घर पे नहीं हूँ
सोचा तीन साल बाद तुमसे रूबरू होने का मौका ऐसे ही जाने दूँ
पर रोक सकती बीमार दिल को तो क्या बात थी
दिल भी उतना मजबूर था जितनी मैं मगरूर थी
दिल जीता मैं हारी और खुल गया दरवाज़ा
दो feet की दूरी पे थे तुम, मेरी आँख में चुभा कुछ धुआं सा
आंसू मैंने बहने नहीं दिए, रोक के रक्खा उन्हें अपनी जगह
छलक के पूछना चाहती थी तुमसे सालों तक ना आने की वजह
तुम्हारे माथे की शिकंज तुम्हारा हाल बयान कर गयी
दिल से हारने के बाद आज मैं फिर खुद से हार गयी
जा रहे थे तुम मेरे हाथ में कागज़ का टुकड़ा थमाए
कुछ सीढ़ियों की दूरी को हम तैय नहीं कर पाए
दस मिनट में मैं शादीशुदा से तलाक़शुदा हो गई
एक दरवाज़ा खोलने का फैसला मेरी बाकी की ज़िन्दगी बन गई
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